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कभी कभी दिल करता है | By Ankita

कभी कभी दिल करता है
माँ के आँचल मे छुप जाऊँ
मीठे मीठे सपनो की सैर कर आऊँ
पर इस उम्र ने मुझसे वो हक़ छीन लिया
उस आँचल से दूर रहने पर मजबूर के दिया

कभी कभी दिल करता है दादू से परियों की कहानियाँ सुनू
राजकुमार ओर राजकुमारी के सुखी जीवन के सपने बूनू
पर जब आता है ख़याल की हो गई हूँ मैं बड़ी
मेरे इच्छाओं के दरवाज़े पर लग जाती ह कड़ी

कभी कभी दिल करता है
पापा की गोद में बेठकर पाऊँ उनका प्यार
या छोटे बच्चे की तरह हो जाऊँ उनके कंधे पर सवार
फिर आता है याद कि बड़ गया हैं मेरा भार
नहीं संभाल पाए तो गिरेंगे ओर खाएँगे माँ से मार

कभी कभी दिल करता है पहले की तरह कंजको पर जाओ
१ प्यारी सी फ़्रॉक पहनकर
१ बँटवा लटकाऊँ
ओर मज़े से बेठकर हलवा पूरी खाऊँ

पर अब हमें कोई नहीं बुलाता
बड़ा कहकर घर से है निकाल देता

कभी कभी दिल करता है दोस्तों से लड़ूँ
छोटी छोटी बातों पर फिर से सड़ूँ
I hate you के बजाए कटी बोलूँ

ओर लड़ाई ख़त्म करने के लिए बोलूँ अबबा
काश मैं ये सब कर सकती रब्बा

काश मैं फिर से बची बन जाती
काश मैं फिर से वो पल जी पाती
काश मई फिर से चुलबुली सी Ankita बन जाती
काश मई फिर से अपने जीवन को ख़ुशियों से महकाती

पर यही ह क़ुदरत की रीत जो सदियों से है चली
ओर किसी के टालने से भी ना है तली

BY : Ankita (MASS COMM DEPTT. PU)

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